Wednesday, 6 February 2013

****बढ़ता चल ****


   
मन की गहराई को टटोल कर ,
राह की हर मुश्किल को धकेल कर ,
तू बढ़ता चल ,अबिचल ,हरपल ...|
संकटों के पहाड़ हैं  बड़े ,
सिर उठाये पथ पर हैं खड़े ,
सुरवीर बनकर आगे निकल ,
तू बढ़ता चल ,अबिचल ,हरपल  ...|
दुःख के सागर को पार कर ,
तूफानों से न हार कर ,
मन में आशा ,हृदय में विश्वास जगाकर ,
तू बढ़ता चल ,अबिचल ,हरपल ...|
कर्म ही धर्म है ,
कर्म का ही तू सम्मान कर ,
जगत कल्याण के खातिर ,
अपनी ज़िन्दगी न्योच्छावर कर ,
तू बढ़ता चल ,अबिचल ,हरपल ...|

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