Tuesday, 23 October 2012

माँ


माँ !!!!
माँ तुम आओगी कब से था इंतज़ार,
धरती सजा रखी है सुमन का उपहार,
फिजाओं गूंज रही है तुम्हारी जय जयकार ,
उत्सब मुखरित है आज सारा संसार ,...|||
लाओ माँ खुशहाली दुनिया के लिए ,
अमन भाईचारा मानब के लिए ,
मिटे विसमता सरसे समता ,
करुणा बरसे तुम्हारी सुख शांति के लिए...|
फैली है समाज में भ्रष्टाचार ,
दुराचारिओं का है भरमार,
पापिओं के प्रकोप से ,
मानव कर रहा है हा हा कार,
अबला का अस्मत लूट कर,
महिषासुर कर रहा है ललकार,
दमन कर इन राक्षसों को माता ,
अपने संतानों का करो उद्धार ....|

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