Tuesday, 12 June 2012

मृत्यु :एक सहेली !!!

मिला है जब से ये जीवन ,
तुम्हारे साथ मेरा ये बंधन ...।
तुम  मेरी और मैं तुम्हारी सहेली कई बरस से ,
जीवन की ओर तुम मुझे  धकेलती रही  कब से ...।
आया नहीं समय तुम्हारा कान में कहती हो मेरे ,
असमय टपक पड़नेवाली ,अंदाज़ निराले है तेरे ...।
तुम इतने समय की पावंद कब से ,
तब खोलती भेद कहती मुझसे ,
असमय नहीं आती रही हूँ ,समय पे सुरु से ....।
जीवन के खाते से मिटाती चलती हूँ ,
तिथि ,दिवस नियत समय से ,
अंत में पहुँच निकट ,बंद कर देती हूँ स्पंदन ,
सच में सहेली ,मिला है जब से ये जीवन ,
तुम्हारे साथ मेरा ये गहरा बंधन,जनम जनम....