Wednesday, 26 October 2011

यादों की दिवाली

जलाता हूँ दीप उसकी यादों में
लोग कहते हैं आज दिवाली है,
रोशन  है सारा संसार मगर,
दिल की बस्ती में मेरी अँधेरा है.....(१)
ख़ुशी के पल में डूबा संसार सारा,
मै भी तो ज़रा हंसता हूँ,
कोई देख न ले मेरे आँसुओं को,
इसलिए अँधेरे में छुप के रोता हूँ....(२)
सुख मिले सारे जहाँ का उसे,
रब से दुआ यही मै करता हूँ,
कैसे मिटादूँ उसकी यादों को दिल से,
यादें ही सही,यादों में ही तो जीता हूँ....(३)

  

Wednesday, 19 October 2011

मुझे उड़ने दो!!!

उड़ने दो मुझे  नीले आसमानों में,
सपनों  को मेरे पंख लगने दो,
सरहदों को आज तोड़ने दो,
लड़ने दो मुझे तूफानों से,खुशिओं को मुट्ठी में भरने दो,
पंख लगा है आज मेरे सपनों को,मुझे उड़ने दो,मुझे उड़ने दो ......|(१)
छूने दो मुझे सूरज को,
हवाओं को मुझे बाँधने दो,
खेलने दो मुझे सागर की लहरों से,
गहराईओं में मुझे डूबने दो,
पंख लगा है आज मेरे सपनो को,मुझे उड़ने दो,मुझे उड़ने दो.....|(2)
नाचने दो मुझे थकने  तक,
आज़ादी  संगीत  मुझे गाने दो,
झूमने दो मुझे बारिस में,
धुप में मुझे तपने दो,
पंख लगा है आज मेरे सपनों को,मुझे उड़ने दो,मुझे उड़ने दो.....|(३)
समेटने दो मुझे यादों को,
दिल की आवाज़ को ज़रा सुनने दो,
मिलने दो मुझे अपनों से,
इंसानों की तरह जीने दो,
पंख लगा है आज मेरे सपनों को,मुझे उड़ने दो,मुझे उड़ने दो....|(४)

  

Monday, 3 October 2011

असलियत

दम तोडती है इमानदारी ,हकीकत के आगे,
कोई नहीं है इमानदार इस भ्रष्टतंत्र  के आगे.
करते हैं व्यापार लहू का,
लुटते है अस्मत गरीबों का,
दिखाकर दम क्षमता का,
खून करते हैं मानवता का,
पहनकर मुखौटा बनते हैं साधू,
धंदे से इनके आता है बदबू,
बचाओ इनसे इस महान देश को,
दिखाओ रास्ता तिहाड़ का इनको.